इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को छूने के बाद ही होता है सूर्यास्त
बताया जाता है कि 8 महीने तक गायब रहने वाले मंदिर में एक स्वर्ग की सीढी है, जिसे 5 हजार साल पहले पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान बनाया था। दरअसल अज्ञातवास पर निकले पांडव जहां कहीं भी रुकते थे, वहां वो अपने रहने के लिए निर्माण कार्य शुरू कर देते थे, लेकिन बाथू की लड़ी में मंदिर के निर्माण के दौरान उन्होंने स्वर्ग में जाने के लिए सीढ़ी बनाने का फैसला किया।
ये काम आसान नहीं था, पांडवों ने इसके लिए भगवान श्रीकृष्ण से आग्रह किया। श्रीकृष्ण ने पांडवों को वरदान दिया। वरदान के मुताबिक पांडवों को स्वर्ग की सीढ़ी बनाने के लिए 6 महीने का समय दिया गया। इस दौरान न तो उन्हें सूर्य के दर्शन होते और न ही कहीं से रोशनी आती। यानी भगवान ने पूरे 6 महीने तक रात कर दिया।
बाथू की लड़ी मंदिर में एक ऐसा भी रहस्य है जो सारे विज्ञान को फेल साबित कर देता है। मौसम चाहे जैसा भी हो यहां सूर्य अस्त तभी होता है, जब सूरज की आखिरी किरणें बाथू मंदिर में विराजमान महादेव के चरण छूती हैं। मुगल काल में इस अद्भुत रहस्य को देखकर मुगल बादशाहों ने पूरी ताकत लगा दी, ताकि मंदिर में सूर्य की किरणों को जाने से रोका जा सके, लेकिन उनकी तमाम कोशिशें बेकार हो गईं।
आज भी मंदिर का ये रहस्य लोगों को हैरानी में डाल देता है। महाभारत काल में बाथू पत्थर से बने बाथू की लड़ी मंदिर में कुल 6 मंदिर हैं। इनमें से पांच छोटे मंदिर हैं, जबकि एक मुख्य मंदिर है। इन छोटे-छोटे मंदिरों में भगवान विष्णु और शेष नाग की मूर्तियां हैं, जबकि मुख्य मंदिर में महादेव का शिवलिंग विराजमान है। हैरानी की बात ये है कि पिछले करीब 50 साल से ये मंदिर हर साल पानी में 8 महीने के लिए डूब जाता है, बावजूद इसके मंदिर पर कोई असर नहीं होता।

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