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Success story- कांगड़ा की इस बेटी के संघर्ष को सलाम, पढ़कर आपकी आंखों में आ जाएंगे आंसू

ठोकरे मिलने के बाद भी नहीं मानी जिंदगी से हार, हासिल किया अपना मुकाम

परिवार में बेटी होने के कारण मां को झेलनी पड़ी थी कई तकलीफें

हिमाचली हलचल।। पिता से प्यार के बदले मिली नफरत, फिर मां को घर से बाहर निकाल देना, मां का कसूर सिर्फ इतना ही बेटी को पैदा करना। आज हम आपको कांगड़ा के उस शख्स के संघर्ष की दास्तां बताने जा रहे हैं, जो सच में काबिले तारीफ है। बार-बार ठोकरें मिलने के बाद भी कांगड़ा की मिनाक्षी ने अपनी जिंदगी से हार नहीं मानी।


परिवार वालों की लड़के की ख्वाइश ने मां को घर से बाहर निकाल दिया

कांगड़ा के केंद्रीय विद्यालय अल्हीलाल की म्यूजिक टीचर मिनाक्षी का जन्म उस परिवार में हुआ, जहां शायद लड़की के जन्म को अपराध माना जाता था। मीनाक्षी का कहना है कि मुझसे बड़ी मेरी एक और बहन है। परिवार वालों ने सोचा ता कि लड़का होगा, लेकिन भगवान को कुछ और मंजूर था और मैं पैदा हो गई। मेरे पैदा होने की खबर सुनते ही घर वालों ने मेरी मां को हर रोज मारना-पीटना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं पिता जी ने मां को तलाक दिए बिना ही दूसरी शादी कर ली।


मां ने हमें पालने के लिए एक वकील के घर में साफ-सफाई का काम करने लग पड़ी। मां का साथ मेरे नाना-नानी ने भी दिया।  जिस वकील के घर मां रोज साफ-सफाई करने जाती थी, उस वकील को मां ने अपनी आपबीती सुनाई। मेरे पिता जी पर कोर्ट में केस कर दिया गया, जिसका फैसला मां के हक में आया और पिता को हमें घर वापस लाना ही पड़ा।

मेरी पढ़ाई के लिए मां को प्राइवेट स्कूल में करनी पड़ी चपरासी की नौकरी

पिता की बेरहमी अभी भी खत्म नहीं हुई थी। मेरी मां को ऐसा कमरा दिया गया, जहां बिजली तक नहीं थी और खर्चे के लिए ये कहकर हमेशा टाला गया कि मैं सरकारी जॉब नहीं करता हूं। मेरी मां ने फिर मजबूरीवश एक निजी स्कूल में चपरासी की नौकरी करनी शुरू कर दी और किसी तरह बड़ी मुश्किलों से मेरी मां ने मुझे ग्रेजुएशन करवाई।

इस तरह जुटाई पढ़ाई करने की फीस 

मिनाक्षी का कहना है कि मुझे बचपन से ही संगीत का बहुत शौक था। कॉलेज में भी म्यूजिक विषय के साथ डिग्री हासिल की थी। इस दौरान मैंने कई प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया। बीए सेंकेड ईयर के दौरान ऑल इंडिया रेडियो से लोकगीत में बी ग्रेड हासिल किया। ग्रेजुएशन के बाद मेरी मां ने मजबूरी के हालात में मुझे आगे पढ़ाने से मना कर दिया।

पीजी की डिग्री के लिए रात-रात भर किए जागरण


मैं संगीत में पीजी डिग्री करना चाहती थी और यह डिग्री रेग्युलर ही की जा सकती है। इसके लिए मुझे ‌हिमाचल प्रदेश विवि में एडमिशन लेनी पड़ती लेकिन मां के पास इतने पैसे नहीं थे। मैं बहुत उदास हुई क्योंकि मेरा पूरा एक साल बर्बाद हो रहा था। मैंने जागरण करने शुरू किए। इसके अलावा लोक संपर्क विभाग की ओर से भी कैजुअल आर्टिस्ट के तौर पर गाना शुरू किया। इस दौरान मैंने पहाड़ी कैसेट के लिए भी अपनी प्रस्तुति दी।

इनमें चंगरे दी नार, शिव दा रूप जोगी, भोले बाबा और जय भोले नाथ आदि प्रमुख हैं। पहाड़ी फिल्म लाजो के लिए भी प्लेबैक सिंगर के तौर पर काम किया। मिंजर मेला, मंडी शिवरात्रि और कुल्‍लू दशहरा में सोलो प्रस्तुति दी। एक साल के भीतर मैंने अपनी शिक्षा के लिए 60 हजार रूपए इकट्ठे कर लिए। अगले साल मैंने पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के लिए पीजी का एंट्रेस एग्जाम दिया। टॉप 15 में मैंने 6वां स्‍थान हासिल किया और मुझे एडमिशन मिल गई।

फर्स्ट डिवीजन में हासिल की पीजी डिग्री

2006-08 तक यहां से एमए म्यूजिक की पढ़ाई की। इस बीच मैंने जागरण में गाने का सिलसिला जारी रखा। इससे मेरी पढ़ाई का खर्च चलता रहा। अप्रैल 2008 मैं फर्स्ट डिवीजन में पीजी डिग्री हासिल की। मई 2008 में मैंने केंद्रीय विद्यालय संगठन के तहत म्यूजिक टीचर के लिए चंडीगढ़ में ही लिखित परीक्षा दी और घर आ गई।

पूरे भारत में 27 सीटों में बनाई जगह 


अब मुझे एमफिल करनी थी लेकिन अक्तूबर में मेरा इंटरव्यू लेटर आ गया। कुछ देर के लिए तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा लेकिन साथ में ये भी सोचा कि पूरे भारत में सिर्फ 27 सीटें तो मेरा नंबर कहां आएगा। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। मैंने दिल्‍ली जाकर इंटरव्यू दिया और एक महीने बाद मुझे ज्वानिंग लेटर मिल गया।

2008 में केंद्रीय विद्यालय लद्दाख में की जॉब

मैंने दिसंबर 2008 में केंद्रीय विद्यालय लद्दाख में ज्वाइन किया। नौकरी करने लगी तो मैंने अपनी बहन को बीएड करवाई क्योंकि उसका भी पढ़ाई का बहुत शौक था। मां का एक सपना अब भी अधूरा था वो था हमारा अपना घर। फिर मैंने नया घर बनवाया। अपनी बड़ी बहन की शादी की और छह माह पहले मैंने भी शादी करके अपना परिवार बसा लिया। 

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